prthvee par jeevan kee shuruaat?

 दोस्तों,हम लोगों के मन में कभी ना कभी यह सवाल जरूर आया होगा कि पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत कैसे हुई। आखिर हमारे इस पृथ्वी पर कई तरह के जीव जंतु कैसे बनेे? पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत कैसे हुई? यह विज्ञान के अनसुलझे पहेलियों में से एक है।

दोस्तों,हाल ही में कनाडा के वैज्ञानिक ने माइक्रोफॉसिल अध्ययन से पता किया कि ग्रहों के बनने से लगभग जीवन की शुरुआत 30 करोड साल बाद हुई। दोस्तों हम लोगों को यह लग रहा होगा कि 30 करोड़ साल बहुत ही ज्यादा लग रहा है। लेकिन भूगर्भिक कालक्रम के पैमाने (geologic time scale) पर यह पलक झपकने के बराबर है. 

दोस्तों ,यह तो हो गई विज्ञान की बातें लेकिन हमारे समाज में ऐसे कई लोग हैं जो जीवन की उत्पत्ति के बारे में कुछ धर्मों से जुड़ी रोचक कथाएं को बताते हैं।इस संदर्भ में प्राचीन विश्व की अनेक सभ्यताओं में अनेक प्रकार के विचार मिलते हैं. अधिकांश सभी धर्मो थोड़ी बहुत फेर बदल मिलते है। लेकिन जीवन का कर्ता-धर्ता ईश्वर को ही माना गया है।  हिंदू ग्रंथों के अनुसार घनघोर बादलों से ब्रह्मा जी का जन्म हुआ। और वह जन्म के तुरंत ही तपस्या करने बैठ गए और उनके तपस्या करने से उनके एक अंग से अनेक प्रकार के जीव उत्पन्न होने लगे। हिंदू ग्रंथों की यही कहानी रही है।

दोस्तों ईसाइयों के धर्म ग्रंथ में इसी प्रकार ईश्वर को माना गया है ईसाई लोग बताते हैं कि लगभग छह हजार साल पहले किसी एक शुभ दिन ईश्वर ने विश्व की सभी प्रजातियों की रचना एक झटके में कर दी. 

वहीं मुसलमानों का पाक किताब कुरान (आयत 21:30) कहता है कि अल्लाह ने हर जीवित चीज को पानी से बनाया है. 

लेकिन दोस्तों हमारा विज्ञान इस बात को नहीं मानता है 

जी,हां दोस्तों हमारे विज्ञान में कुछ ऐसे महान वैज्ञानिक हैं यह सिद्ध कर दिया है कि जीवन की उत्पत्ति कैसे हुई। उन्हें वैज्ञानिकों में से एक महान वैज्ञानिक अरस्तु जी हैं जिसके बारे में आपने कहीं ना कहीं पढ़ा या सुना होगा। यह बताते हैं कि जीवन की शुरुआत मिट्टी, कीचड़, धूल और हर तरह के कचरे या सड़ती हुई चीजों से बिलबिलाते हुए जीवों के समूह पैदा हो जाते हैं, इसलिए हो सकता है इन्सानों की भी उत्पत्ति ऐसे ही हुई हो।

हां दोस्तों आपने कहीं ना कहीं देखा होगा कि गंदे पानी में कुछ दिनों में उसमें कीड़े उत्पन्न हो जाते हैं।

स्वत: उत्पत्ति का यह सिद्धांत तब तक वैज्ञानिकों के बीच जीव उत्पत्ति की व्याख्या के रूप में छाया रहा, जबतक कि फ्रांसीसी सूक्ष्म जीवविज्ञानी लुई पास्चर ने 1862 में अपने प्रयोगों द्वारा निर्विवाद रूप से इसको निर्मूल सिद्ध नहीं कर दिया. पास्चर का कहना था कि जीवन सेही जीवन की उत्पत्ति हुई है. लेकिन यह सवाल अभी भी बरकरार था कि कि पृथ्वी पर सबसे पहला जीव कब, कैसे और कहाँ से आया?

चार्ल्स डार्विन और जीवन की उत्पत्ति: 

चार्ल्स डार्विन अपने समय के महान वैज्ञानिक थे। इन्होंने ईश्वर के सभी अवधारणाओं को नकारते हुए। बताया कि जीवन की शुरुआत अंदरूनी दिव्य शक्ति या रचयिता का कोई भी हाथ नहीं है। बल्कि जीवन की उत्पत्ति रासायनिक अभिक्रियाओं और भौतिक प्रक्रियाओं के मेलजोल चलते हुई.

और उन्होंने यह भी बताया कि जीवन की शुरुआत निर्जीव पदार्थों से हुई है। इन्होंने 1871 में यह बताया कि जीवन की शुरुआत गर्म पानी से हुई हो। क्योंकि गर्म पानी मेंसभी तरह के अमोनिया और फॉस्फोरिक साल्ट घुले होंगे जिस पर ऊष्मा, प्रकाश,और विद्युत की क्रिया होती रही होगी. इससे एक प्रोटीनयुक्त यौगिक (protein-rich compound) बना होगा जिसमें और परिवर्तन होकर निर्जीव पदार्थों से पहले जीव बने होंगे. और यह हमारे किताबों में भी लिखा हुआ है जिसे हम पढ़ते हैं।

कैसे हुई निर्जीव पदार्थों से जीवन की शुरुआत:

ऑक्सीजन कार्बनिक अणुओं के संश्लेषण (synthesis) को रोकता है और जीवन की उत्पत्ति के लिए कार्बनिक अणुओं का बनना बेहद जरूरी है. आज से लगभग 3.8 अरब साल पहले किसी ऑक्सीजन की अनुपस्थिति वाले वातावरण में सूर्य की ऊष्मा और प्रकाश की क्रिया से कार्बनिक अणुओं का एक जटिल प्राइमर्डियल सूप या आदिम शोरबा बना होगा. सूप के भीतर जटिल अणु, खासकर प्रोटीन और न्यूक्लिक एसिड मौजूद थे, जो कुछ साधारण संघटकों (ingredients) कीलंबी श्रृंखला से मिलकर बने थे. इन जटिल संघटकों के फ्यूजन से छोटी-छोटी बूंदेंबनी जिनके और ज्यादा फ्यूजन से ये विकसित होकर, विभाजनकर कालांतर में अपने समान अन्य सरल कोशिकाओं का निर्माण कर सकीं. यही सरल कोशिकाएं सभी जीवों की आदि पूर्वज (primordial ancestor) थीं.

दोस्तों इसलिए हमारे विज्ञान याद आती है कि जीवन की उत्पत्ति समुद्र से हुई है समुद्र से पहले छोटे जी उत्न्न हुए जो आगे चलकर विकसित हुए और वह हमारे पूर्वज रहे होंगे 

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